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उत्तराखण्ड का खानपान

उत्तराखंड का पारंपरिक भोजन पूरी तरह पोषक तत्वों से परिपूर्ण है, हमारे पूर्वजों ने मोटेअनाज से तैयार पारंपरिक व्यजंनों को खाने की सलाह दी है। हमारा आहार कैसा हो इसके लिए उत्तराखंड में प्राचीन काल से एक व्यवस्था बनी हुईं है, जिसमें भोजन पूरी तरह संतुलित व पोषक तत्वों से पूर्ण होता है,  यह एक प्रकार से यह 'बैलेंस डाइट' है। गेहूँ ,धान, मंडुवा, झंगोरा, ज्वार, चौलाई, तिल, राजमा, उड़द, गहथ, नौरंगी, लोबिया और तोर जैसे अनाजों से यहां पर पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं।  पहाड़ में लोगों ने अपनी आवश्यकता के अनुसार कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन ईजाद किए हैं। इनमें दाल-भात के साथ ही कापा, झोइ(कढ़ी), पल्यो, मंडुवा) व मक्का की रोटी, आलू का थिच्वाडी, आलू का गुटके,मादिर का भात, पुआ, बाल मिठाई, भांग की चटनी, भट का चुडकाणि, डुबुक, गहत की दाल, , मादीर की खीर, तिल की चटनी आदि प्रमुख है, सब्जियों में सिसोण का साग,  तैड, गेठी भी बनाई जाती है।  आलू के गुटके आलू के गुटके विशुद्ध रूप से कुमाऊंनी स्नैक्स हैं। इसके लिए उबले हुए आलू को इस तरह से पकाया जाता है कि आल...

उत्तराखंड की जंगली जड़ी बूटियाँ - Wild herbs of uttrakhand

उत्तराखंड को प्रकृति ने दिल खोल कर दुर्लभ खजाने दिये हैं, एक ओर जहाँ सुँदर प्राकृतिक वातावरण प्रदान किया है तो, वहीं जंगलों को एक से बढकर एक दुर्लभ जड़ी बूटियों से भर दिया है, ये जड़ी बूटियाँ अपने औषधीय गुणों से लोगों को विस्मित कर देती हैं,ये जड़ी बूटियाँ असाध्य से असाध्य रोगों को दूर करने में सक्षम है। आज ऐसी ही कुछ जड़ी बूटियों के बारे में आपको विस्तार से जानकारी देने का प्रयास इस लेख के माध्यम से कर रहे हैं। निर्गुन्डी (वाइटेक्स निर्गुण्डो)- ये गठिया वात, सूजन व कान दर्द , माँस पेशियों ,अस्थमा, त्वचा चमकदार, माइग्रेन ,पाचन तंत्र व बालों के विकास के लिए फायदेमंद है। जटामांसी (वैलेरियाना जटामांसी)- ये हैजे की बीमारी में बहुत फायदेमंद होती है,इसके अलावा  यह शक्ति वर्धक दवाईयाँ बनाने में भी काम आती है ये हमारे इम्यून सिस्टम को ठीक रखती है, इसके अतिरिक्त दिल के रोग, उच्च रक्तचाप ,मिर्गी, मानसिक थकावट, अनिद्रा, सिर दर्द, दिमाग तेज करने, चिंता दूर करने में सहायक है। वज्रदंती (पोटेन्सिला फ्रुटीकोसा) ये दाँतों के लिए सबसे अधिक उपयोगी है,मसूड...