उत्तराखंड के ग्रामीण भूभाग में आज भी जैविक पद्धति से खेती की जा रही है, चाहे वो गेंहू हो या चावल, विभिन्न तरह की दाल हो या मसालें, पर इसके अतिरिक्त भी ,पहाड़ में कई ऐसी फसल बोई जाती है, जो अपने जैविक गुणों व साफ वातावरण में उगने के कारण स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है, ऐसी ही एक फसल है मुंडूवा यानी फिंगर मिलेट। मुंडूवा को हिंदी में रागी कहा जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी रोटी बनाकर खाई जाती है, पर हम इसके गुणों से कम ही परिचित हैं, इस लेख में आज इन्ही गुणों के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है। प्राचीन काल से ही हमारे देश में मोटे अनाज आदि का सेवन किया जाता रहा है। इन्हीं मोटे अनाजों में मुंडूवा भी शुमार है, यह अनाज सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है है इसका स्वाद बेहद स्वादिष्ट होता है, मुंडूवा में कई बीमारियों को ठीक करने के राज छिपे हुए हैं, यदि हम मुंडूवा को अपने नियमित आहार में शामिल कर लें तो, ये हमारे स्वास्थ्य के लिये बहुत फायदेमंद साबित होगा। लोग मुंडूवा को एक अनाज के तौर पर ही जानते हैं, लेकिन इसके फायदों के बारे में विशेष जानकारी ...
उत्तराखंड में पायी जाने वाले विभिन्न तरह कें खाद्यान्नों एवं जड़ीबूटीयों कें बारे में जानकारी प्राप्त करने कें लिये पढ़िए इस ब्लॉग कों