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जुलाई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जखिया - Dog mustard

जखिया-Dog Mustard जखिया कें फायदे: उत्तराखंड की बात ही निराली है, यहाँ जहाँ सुँदर ओर मनमोहक दृश्यों की भरमार है तो, वहीं खानपान में प्रयुक्त होने वाले मसालों की अपनी खास तासीर व स्वाद है, इसलिए इस लेख के माध्यम से ,एक ऐसे मसालें के स्वाद व उसके गुणों के बारे में जानकारी देंगें, जिसका जादुई स्वाद आपको लुभा देगा। आप सोच रहे होंगें भला ऐसा कौनसा मसाला है, जिसमें जादुई स्वाद की ताकत है, तो ये मसाला है जख्या या जखिया, इसका स्वाद ही इतना खास ओर अनुपम है की ये खाने को एक अलग ही लज्जत प्रदान कर देता है। यह पहाड़ी मसाला अपनी महक और जायके के लिये, पूरे उत्तराखंड में मशहूर है , इसका पहाड़ी इलाकों में तड़के के रूप में काफी इस्तमाल किया जाता है जख्या या जखिया के दाने कुछ कुछ सरसों और राई की तरह ही दिखते हैं, पहाड़ की रसोई में इसका दर्जा जीरे का जितना ही महत्वपूर्ण है। ना जाने कितने व्यंजनों में इसका तड़का लगाया जाता है, जख्या राइस तो जिसमें लाजवाब होता है, इसके अतिरिक्त आलू के गुटके, दाल, अरबी ओर भी ना जाने कितने व्यंजनों में इसका छौंक लगाया जाता है। जख्या...

उत्तराखंड के जंगली फल

उत्तराखंड राज्य प्राकृतिक संपदाओं से इतना लबरेज है की,अगर इन संपदाओं का यहाँ के लोग, अपनी अर्थ व्यवस्था को सुधारने में करे तो, उनकी समस्त आर्थिक समस्या दूर हो जाये, यहाँ के किसी नागरिक को पलायन करने की जरूरत ना पड़े, पर जानकारी का अभाव होने से, इन संपदाओं का उपयोग ना के बराबर हो रहा है। यहाँ के वनों में मिलने वाले फलों को अगर बाजार मिल जाये तो ये अर्थ व्यवस्था सुधारने में मददगार साबित हो सकता है। यहाँ के वनों में ऐसे फल होते हैं, जो अपने औषधिय गुणों के कारण बड़े काम के हैं, पर समझ की कमी व बाजार का अनुभव ना होने से बर्बाद हो जाते हैं।  इन फलों की कीमत ओर माँग जानकर आप हैरान रह जायेगे,इतनी महत्वपूर्ण  उपज का उपयोग क्यों नही होता। सरकार भी अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं कर पायी है,जिसके कारण ये सब हाशिये पर पड़ी हैं, ओर इस कारण राज्य व लोगों का आर्थिक नुकसान हो रहा है।  आज आपको ऐसे ही कुछ फलों के बारे जानकारी दी जा रही है, जिसमें में इन फलों में मौजूद  विटामिन्स और एंटी ऑक्सीडेंट व अन्य गुण कितने हैं।  उत्तराखंड राज्य में प्राकृतिक रूप से उगने वाले फलों ...

पहाड़ी सुपर फूड मंडुवा ( रागी )

उत्तराखंड के ग्रामीण भूभाग में आज भी जैविक पद्धति से खेती की जा रही है, चाहे वो गेंहू हो या चावल, विभिन्न तरह की दाल हो या मसालें, पर इसके अतिरिक्त भी ,पहाड़ में कई ऐसी फसल बोई जाती है, जो अपने जैविक गुणों व साफ वातावरण में उगने के कारण स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है, ऐसी ही एक फसल है मुंडूवा यानी फिंगर मिलेट। मुंडूवा को हिंदी में रागी कहा जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी रोटी बनाकर खाई जाती है, पर हम इसके गुणों से कम ही परिचित हैं, इस लेख में आज इन्ही गुणों के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है। प्राचीन काल से ही हमारे देश में मोटे अनाज आदि का सेवन किया जाता रहा है। इन्हीं मोटे अनाजों में मुंडूवा भी शुमार है, यह अनाज सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है है इसका स्वाद बेहद स्वादिष्ट होता है, मुंडूवा में कई बीमारियों को ठीक करने के राज छिपे हुए हैं, यदि हम मुंडूवा को अपने नियमित आहार में शामिल कर लें तो, ये हमारे स्वास्थ्य के लिये बहुत फायदेमंद साबित होगा। लोग मुंडूवा को एक अनाज के तौर पर ही जानते हैं,  लेकिन इसके फायदों के बारे में विशेष जानकारी ...