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उत्तराखंड की जंगली जड़ी बूटियाँ - Wild herbs of uttrakhand

उत्तराखंड को प्रकृति ने दिल खोल कर दुर्लभ खजाने दिये हैं, एक ओर जहाँ सुँदर प्राकृतिक वातावरण प्रदान किया है तो, वहीं जंगलों को एक से बढकर एक दुर्लभ जड़ी बूटियों से भर दिया है, ये जड़ी बूटियाँ अपने औषधीय गुणों से लोगों को विस्मित कर देती हैं,ये जड़ी बूटियाँ असाध्य से असाध्य रोगों को दूर करने में सक्षम है। आज ऐसी ही कुछ जड़ी बूटियों के बारे में आपको विस्तार से जानकारी देने का प्रयास इस लेख के माध्यम से कर रहे हैं। निर्गुन्डी (वाइटेक्स निर्गुण्डो)- ये गठिया वात, सूजन व कान दर्द , माँस पेशियों ,अस्थमा, त्वचा चमकदार, माइग्रेन ,पाचन तंत्र व बालों के विकास के लिए फायदेमंद है। जटामांसी (वैलेरियाना जटामांसी)- ये हैजे की बीमारी में बहुत फायदेमंद होती है,इसके अलावा  यह शक्ति वर्धक दवाईयाँ बनाने में भी काम आती है ये हमारे इम्यून सिस्टम को ठीक रखती है, इसके अतिरिक्त दिल के रोग, उच्च रक्तचाप ,मिर्गी, मानसिक थकावट, अनिद्रा, सिर दर्द, दिमाग तेज करने, चिंता दूर करने में सहायक है। वज्रदंती (पोटेन्सिला फ्रुटीकोसा) ये दाँतों के लिए सबसे अधिक उपयोगी है,मसूड...

जखिया - Dog mustard

जखिया-Dog Mustard जखिया कें फायदे: उत्तराखंड की बात ही निराली है, यहाँ जहाँ सुँदर ओर मनमोहक दृश्यों की भरमार है तो, वहीं खानपान में प्रयुक्त होने वाले मसालों की अपनी खास तासीर व स्वाद है, इसलिए इस लेख के माध्यम से ,एक ऐसे मसालें के स्वाद व उसके गुणों के बारे में जानकारी देंगें, जिसका जादुई स्वाद आपको लुभा देगा। आप सोच रहे होंगें भला ऐसा कौनसा मसाला है, जिसमें जादुई स्वाद की ताकत है, तो ये मसाला है जख्या या जखिया, इसका स्वाद ही इतना खास ओर अनुपम है की ये खाने को एक अलग ही लज्जत प्रदान कर देता है। यह पहाड़ी मसाला अपनी महक और जायके के लिये, पूरे उत्तराखंड में मशहूर है , इसका पहाड़ी इलाकों में तड़के के रूप में काफी इस्तमाल किया जाता है जख्या या जखिया के दाने कुछ कुछ सरसों और राई की तरह ही दिखते हैं, पहाड़ की रसोई में इसका दर्जा जीरे का जितना ही महत्वपूर्ण है। ना जाने कितने व्यंजनों में इसका तड़का लगाया जाता है, जख्या राइस तो जिसमें लाजवाब होता है, इसके अतिरिक्त आलू के गुटके, दाल, अरबी ओर भी ना जाने कितने व्यंजनों में इसका छौंक लगाया जाता है। जख्या...

उत्तराखंड के जंगली फल

उत्तराखंड राज्य प्राकृतिक संपदाओं से इतना लबरेज है की,अगर इन संपदाओं का यहाँ के लोग, अपनी अर्थ व्यवस्था को सुधारने में करे तो, उनकी समस्त आर्थिक समस्या दूर हो जाये, यहाँ के किसी नागरिक को पलायन करने की जरूरत ना पड़े, पर जानकारी का अभाव होने से, इन संपदाओं का उपयोग ना के बराबर हो रहा है। यहाँ के वनों में मिलने वाले फलों को अगर बाजार मिल जाये तो ये अर्थ व्यवस्था सुधारने में मददगार साबित हो सकता है। यहाँ के वनों में ऐसे फल होते हैं, जो अपने औषधिय गुणों के कारण बड़े काम के हैं, पर समझ की कमी व बाजार का अनुभव ना होने से बर्बाद हो जाते हैं।  इन फलों की कीमत ओर माँग जानकर आप हैरान रह जायेगे,इतनी महत्वपूर्ण  उपज का उपयोग क्यों नही होता। सरकार भी अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं कर पायी है,जिसके कारण ये सब हाशिये पर पड़ी हैं, ओर इस कारण राज्य व लोगों का आर्थिक नुकसान हो रहा है।  आज आपको ऐसे ही कुछ फलों के बारे जानकारी दी जा रही है, जिसमें में इन फलों में मौजूद  विटामिन्स और एंटी ऑक्सीडेंट व अन्य गुण कितने हैं।  उत्तराखंड राज्य में प्राकृतिक रूप से उगने वाले फलों ...